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आत्मचिंतन
आत्मचिंतन वह स्थान है जहाँ मनुष्य स्वयं से संवाद करता है।
यहाँ जीवन की दौड़ नहीं, ठहराव की समझ है।
यहाँ हार नहीं, सीख है।
और यहाँ शब्द नहीं, चेतना बोलती है।
मैं हारा नहीं हूँ — बस रुका था




49 की उम्र: अंत नहीं, आत्मबोध का प्रवेश द्वार
49 की उम्र कोई अंत नहीं, बल्कि आत्मबोध की शुरुआत है। अनुभव, परिपक्वता और नई दिशा पर एक गहन आत्मचिंतन लेख।

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