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DeshDharti360.com एक चेतनशील डिजिटल मंच है ,
जहाँ भारतीय संस्कृति, गौमाता, जल चेतना, पर्यावरण, युद्ध की विवेचना और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों

को जीवन की गहराइयों से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है।

यह केवल एक वेबसाइट नहीं है।
यह उन संवेदनशील आत्माओं के लिए एक स्थान है,
जो भारत की आत्मा, परंपरा और प्रकृति को आधुनिक संकटों के बीच जीवित रखना चाहते हैं।

यहाँ आप पाएँगे:

गौमाता और ग्राम्य जीवन की प्रेरक कथाएँ

जल और जीवन का आध्यात्मिक संबंध

युद्ध और मानवता का दार्शनिक विश्लेषण

पर्यावरणीय चेतना और व्यावहारिक समाधान

और एक जीवन-स्पर्शी मानसिक स्वास्थ्य श्रृंखला ,
जहाँ मन की पीड़ा को समझा जाता है, दबाया नहीं जाता

यहाँ Wellness को केवल “स्वास्थ्य” नहीं माना जाता ,
बल्कि आत्मिक जागरूकता, मानसिक संतुलन और आंतरिक स्वतंत्रता के रूप में समझा जाता है।

हमारा उद्देश्य

हम चाहते हैं कि:

हर विचारशील पाठक,
हर जिज्ञासु युवा,
हर ग्रामीण साधक ,

जब इस मंच पर आए,
तो उसे शब्दों में शांति,
चित्रों में प्रेरणा,
और लेखों में आत्मीयता मिले।

हमारा संकल्प

DeshDharti360 केवल समस्याएँ नहीं उठाता ,
यह समाधान की दिशा भी सुझाता है।

हम जल, जीवन, गाय, संस्कृति और पृथ्वी की आत्मा के संरक्षण के लिए एक डिजिटल संकल्प हैं।

हम मानते हैं:

जल बचाना भविष्य बचाना है

मन को समझना समाज को समझना है

गौमाता की सेवा ग्राम्य अर्थव्यवस्था की रक्षा है

और प्रकृति से जुड़ना आत्मा से जुड़ना है

यह मंच आपको निमंत्रण देता है

“आइए, मिलकर जल, जीवन, संस्कृति और पृथ्वी की चेतना को पुनर्जीवित करें।”

DeshDharti360 एक वेबसाइट नहीं ,
यह एक वापसी है।
धरती माँ की गोद में लौटने का एक प्रयास।

यह एक डिजिटल संकल्प है ,
भारत को भीतर से मजबूत करने का।

✍️

रोहित थपलियाल
संस्थापक एवं संपादक
DeshDharti360

हम जमीनी मुद्दों और धरती माँ की पुकार को उठाते हैं।
आइए, इस यात्रा में सहभागी बनें और संस्कृति का सम्मान करें।

rohit thapliyal
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हमारे बारे में जानें

About the Author

रोहित थपलियाल
संस्थापक एवं संपादक, DeshDharti360

रोहित थपलियाल एक स्वतंत्र चिंतक और नागरिक-चेतना आधारित लेखन के पक्षधर हैं। उनका लेखन भारत की सामाजिक संरचना, राष्ट्रीय आत्मचिंतन, प्रशासनिक जवाबदेही और नीति-आधारित समाधान पर केंद्रित है।

DeshDharti360 के माध्यम से वे केवल समस्याओं को रेखांकित करने का प्रयास नहीं करते, बल्कि संरचनात्मक सुधार, सामाजिक सद्भाव और जिम्मेदार नागरिकता की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाने का उद्देश्य रखते हैं।

उनका विश्वास है कि
राष्ट्र की शक्ति केवल भावनाओं में नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक विवेक में निहित है।